डॉ विजय शुक्ल भारतीय राजनीति में इन दिनों एक नया पहाड़ा पढ़ाया जा रहा है। वह पहाड़ा जो स्कूलों में नहीं पढ़ाया गया, लेकिन राजनीतिक मंचों, टीवी बहसों और सोशल मीडिया के गलियारों में खूब सुनाई दे रहा है। पहाड़ा कहता है— तीन एक्कम एक। पहली नजर में यह गणित की गलती लगती है। आखिर तीन एक्कम तीन होता है, एक कैसे हो गया? लेकिन राजनीति का गणित अक्सर अंकगणित से नहीं चलता। यहां समीकरण सत्ता लिखती है, व्याख्या प्रचार करता है और जनता उसे अपने-अपने चश्मे से देखती है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर बारह बरस पूरे होने के बाद देश में यही नया राजनीतिक गणित चर्चा में है। तथ्य कहते हैं कि भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वालों की सूची में आज भी जवाहरलाल नेहरू पहले स्थान पर हैं। इंदिरा गांधी दूसरे स्थान पर हैं। नरेंद्र मोदी तीसरे स्थान पर हैं। आंकड़े साफ हैं, कैलकुलेटर भी यही बताता है और इतिहास की किताबें भी। लेकिन राजनीति कह रही है कि नहीं, मामला इतना सीधा नहीं है। और भाजपा चूँकि दुनिया की सबसे बड़ी सियासी पार्टी हैं तो अब जो वो इतिहास का पन्ना लिखेगी उसको एक सौ चालीस करोड़ भारतीय सीख...
l शेखर साहित्य और विशेष रूप से शायरी केवल शब्दों का खेल नहीं है। वह मनुष्य के भीतर की संवेदनाओं, अनुभवों, संघर्षों, सपनों, प्रेम, पीड़ा और जीवन-दर्शन की अभिव्यक्ति है। शायरी का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के हृदय तक पहुँचना और उसके अनुभवों को शब्द देना है। किंतु समय-समय पर शायरी की धाराएँ बदलती रही हैं। भाषा, शैली, प्रतीक और अभिव्यक्ति के स्वरूप भी बदलते रहे हैं। शायरी का अपना एक विशिष्ट व्याकरण और शिल्प है। उसके मूल नियमों का पालन किए बिना लिखी गई रचना उत्कृष्ट कविता तो हो सकती है, किन्तु उसे शायरी नहीं कहा जा सकता। शायरी की संरचना में बह्र, क़ाफ़िया और रदीफ़ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ये केवल तकनीकी तत्व नहीं, बल्कि शायरी की पहचान हैं। इनमें किसी प्रकार की त्रुटि या समझौता रचना को शायरी की पारंपरिक कसौटी से बाहर ले जाता है। किन्तु केवल शिल्पगत शुद्धता ही पर्याप्त नहीं होती। एक अच्छे शेर में कोई ऐसी बात अवश्य होनी चाहिए जो विचार, अनुभूति या अनुभव के स्तर पर पाठक को छू सके। शेर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह केवल दो मिसरों में एक संपूर्ण भाव, विचार या अनुभूति को व्यक्त कर...