डॉ विजय शुक्ल लोकल न्यूज ऑफ इंडिया नई दिल्ली . स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही भारत ने केवल औपनिवेशिक शासन से मुक्ति ही नहीं पाई थी, बल्कि अपने अतीत को समझने और उसे नई पीढ़ियों तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी अपने हाथों में ली थी। यह जिम्मेदारी शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से पूरी की जानी थी और शिक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम बनीं इतिहास की पाठ्य पुस्तकें। लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि स्वतंत्रता के बाद लिखे गए इतिहास में कई ऐसे पहलू रहे जिन पर अपेक्षित गहराई से चर्चा नहीं हो पाई। कई घटनाएँ और प्रसंग या तो सीमित रूप में सामने आए या उन्हें एक विशेष दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। इसी कारण समय-समय पर इतिहास लेखन को लेकर यह प्रश्न उठता रहा कि क्या हमारी पाठ्य पुस्तकें भारत के अतीत की पूरी कहानी कह पाती हैं या नहीं। भारत का इतिहास केवल राजाओं, युद्धों और सत्ता परिवर्तन की घटनाओं का क्रम नहीं है। यह एक ऐसी सभ्यता की कहानी है जिसकी जड़ें हजारों वर्षों में फैली हुई हैं। वेदों, उपनिषदों, बौद्ध दर्शन, जैन परंपरा, भक्ति आंदोलन और असंख्य सांस्कृतिक धाराओं से निर्मित इस देश की पहचान केवल राजनीतिक घटना...
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया चेन्नई, 5 मार्च। लेखक चन्दन कुमार की पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और उनके समर्पण पर आधारित पुस्तक “समर्पण दीनदयाल उपाध्याय” के तमिल और अंग्रेज़ी संस्करण का भव्य विमोचन गुरुवार शाम चेन्नई के भारतीय विद्या भवन मायलापुर में आयोजित समारोह में किया गया। विमोचन समारोह में अरविन्द मैनन, नैनर नागेंद्रन, वनाथी श्रीनिवासन तथा पूर्व पुलिस महानिदेशक के. वी. एस गोपालकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति रही। लेखक चन्दन कुमार ने बताया कि यह पुस्तक अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के त्याग, समर्पण और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने के उनके विचारों से प्रेरित है। पुस्तक में उनके जीवन के कई अनछुए पहलुओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है। समारोह में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने एक स्वर में पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति देश में लोककल्याणकारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की समझ को जन-जन तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगी और युवाओं में त्याग, समर्पण तथा सादा जीवन-उच्च विचार की भावना को मजबूत करेगी। तमिलनाडु भाजपा प्रभारी अरविंद मेनन ने कहा कि यह पुस्तक युवाओं को अंत...