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क्या भाजपा की निगाह में लोकसभा में भूतपूर्व नौकरशाह और नए चेहरों को मिलेगी ज्यादा तवज्जो ?


 

गुरुदर्शन  शर्मा  
लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया 
दिल्ली।  आजकल दिल्ली की सियासी गर्मी बढ़ी हुई हैं।  उम्मीदवार अपनी अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं तो पार्टियां अपनी अपनी जीत हार का गुणा गणित। हिमाचल में बदले सियासी खेल ने लोकसभा की पूरी बिछी बिछाई बिसात को उलट पुलट करके रख दिया। जिससे एक बात तो साफ़ हो गयी कि राज्यसभा में मिली हार के पीछे कांग्रेस सत्ता का अपने ही विधायकों से दूरी बनाकर रखना और उनकी अनदेखी कर उनको तिरस्कृत करना एक बड़ा कारण था।  भाजपा ने ना तो ऑपरेशन लोटस किया न कोई बड़ी कवायद पर लोकल मुद्दे को कांग्रेसी   विधायकों ने मुद्दा बनाया और कांग्रेस से भाजपा में शामिल हर्ष महाजन को राज्यसभा सांसद बनाया।  कांग्रेस में बड़ा कद रखने वाले सिंघवी के लिए यह अपमान जनक स्तिथि सी बन गई और इस हार का ठीकरा सही मायने में अगर कहीं फूटना चाहिए था तो वो सुखविंदर सिंह सुक्खू साहब पर जिनके लिए हर एक  आम आदमी बोलता फिर रहा हैं कि सुक्खू जी एरोगेंट हो गए हैं जो कि सुक्खू पहले कत्तई ना थे और ऐसे सलाहकारों से घिरे हैं जो सिर्फ खुद की सोचते हैं राज्य की नहीं। 

बहरहाल इस घटना ने लोकसभा का पूरा खेल  और माहौल बदल कर रख दिया जिसके कारण किसी भी विधायक को अब लोकसभा का टिकट ना देना भाजपा की मजबूरी बन गई तो हारे हुए प्रत्याशी या कमजोर प्रत्याशी को मैदान में ना उतारने की भी बंदिश।  हमीरपुर के अलावा बाकी सभी सीट पर उम्मीदवार नए चेहरे संभावित दिख रहे हैं और महिला नेत्री को शिमला से तो कांगड़ा से किसी भूतपूर्व नौकरशाह को उतारने की उम्मीद जनता को हैं क्योकि जातिगत आकड़े में राजपूत, ब्राह्मण,ओबीसी और एससी मतदाताओं  गुणा गणित और मौजूदा सांसद की निष्क्रियता का तोड़ इस ब्राह्मण और ग्रामीण परिवेश से आये नौकरशाह पर भाजपा देखेगी ऐसा लोग कयास लगा  रहे हैं क्योकि अगर बाकी उम्मीदवारों की संगठन और राजनीतिक पृष्ठभूमि आंकी जायेगी तो इस नौकरशाह की छत्तीस साल की नौकरी, बागवानी , टैक्सेशन और एसडीएम से लेकर जिला कलेक्टर तक की भूमिका को लोग भाजपा की उम्मीदवारों वाली प्रक्रिया में पहली पसंद मान रहे हैं और मौजूदा परिवेश में ब्राह्मण चेहरे को जिताऊ उम्मीदवार के रूप में भी। कांग्रेस के सुधीर शर्मा के बगावती रूख के बाद भाजपा चाहेगी कि कोई ब्राह्मण उम्मीदवार कांगड़ा से जीते जिसका असर बाकी राज्यों में ब्राह्मण मतदाताओं को प्रभावित करेगा। हाल ही में इस नौकरशाह ने भाजपा का दामन थामा और भाजपा ने तुरंत चुनाव प्रबंधन प्रकोष्ठ में जिम्मेदारी के साथ प्रदेश में लगा दिया। टिकट की दौड़ में पत्नी संग विवाद में आये विशाल नहरिया हैं तो वही संगठन से कोई अन्य नाम भी। पर चर्चा में माल रोड से लेकर धर्मशाला में यह भूतपूर्व नौकरशाह हैं जिसको कर्मचारियों का एक बड़ा तबका भी चाहता हैं. 

वैसे बैठकों का दौर अब दिल्ली दरबार तक जाकर आखिरी घोषणा का इन्तजार तक का सफर तय कर चुका हैं। और मंडी से कमोबेश नए चेहरे के रूप में चमन कपूर , अजय राणा जैसे नाम चर्चा में हैं और नए चेहरे और सामाजिक रूप रेखा में मनाली नगर परिषद् अध्यक्ष चमन कपूर का नाम आगे माना जा रहा हैं पर कांग्रेस के बगावती तेवर में पार्टी प्रतिभा सिंह के दांव का इंतजार करते हुए ही इस पर कोई फैसला लेगी जिसकी संभावना ज्यादा हैं। 
लोकसभा चुनावों में भाजपा में जिस तरह से भूतपूर्व नौकरशाहों की भूमिका रही हैं ऐसे में हिमाचल से इस भूतपूर्व नौकरशाह जगदीश चन्दर शर्मा की गुंजाइश ज्यादा बनती दिख रही हैं अब भाजपा केंद्रीय नेतृत्व किसको और किस प्रक्रिया के तहत तरजीह देता हैं यह तो आने वाला वक़्त बताएगा पर भाजपा की नीति कांग्रेस के बागियों की स्तिथि और सरकार के असंतुलित होने की परिस्थति पर ज्यादा निर्भर करेगी।  

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