ALL हिमाचल-पंजाब-लेह लद्दाख-कश्मीर विजय पथ-सम्पादकीय-लेख-खास रपट हरियाणा- राजस्थान उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड-बिहार दिल्ली सोनभद्र-मिर्ज़ापुर राजनीति-व्यापार-सिनेमा-समाज-खेती बारी देश-विदेश मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़-झारखंड लोकल साथी
"सुंदर सपना टूट गया" 'इमोशनल ब्लैकमेलिग का गंदा खेल'
June 2, 2020 • Vijay Shukla • सोनभद्र-मिर्ज़ापुर

"सुंदर सपना टूट गया", इमोशनल ब्लैकमेलिग का गंदा खेल' 

 

 "दीपक तले अंधेरा"

      •  महारत्न कंपनी एनटीपीसी परिसर से सटा हुआ,रोटी, कपड़ा और मकान ही नहीं वरन सड़क, शौचालय, स्वच्छ पेयजल की एक-एक बूंद को तरसता सिरसोती ग्राम सभा का 'महुआ बारी टोला'
      • दुर्व्यवस्था को देख कर्तव्यबिमूढ,अवाक, स्तब्ध रह गई एलएनआई टीम 'अपनी ढपली अपना राग' अलापने में लगे संबंधित पक्ष
      • चेहरे पर बयां करती बेबसी, उदासी एवं मजबूरियों के बीच ग्रामीणों ने खुलकर साझा किया 

देख कलेजा फट जाता है, आंखों से आंसू बहते,

ऐसा ना हो कलम रो पड़े,सच्चाई कहते-कहते।

चीख पड़ी खेतों की माटी,तड़प उठी गम से धरती,

बिना कफन जब पगडंडी से, गुजरी थी उसकी अर्थी।

आज वही था विदा हो गया, जिसे चिंता थी इंसान की,

 टूटी माला जैसी हो गई, हालत आज किसान की। 

 

साधना द्विवेदी

लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया 

बीजपुर, सोनभद्र। बढ़ते मर्ज की अप्रासंगिक दवा बना तथा बदहाली के दिल दहला देने वाले दृश्यों में वर्तमान चुनौतियों के स्वर्णिम भविष्य की तलाश करता, 'सरकारी योजनाओं के विफलता का स्मारक' बना पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के सिरसोती ग्राम सभा का लगभग 500 आबादी वाला महुआबारी टोला। 'रिहंद' के आंचल में बसा महारत्न कंपनी एनटीपीसी के परिसर से लगा हुआ 'आत्मनिर्भर भारत के बदहाली का दर्दनाक मंजर' दिखाता यह टोला व्यक्तिवादी उन्माद के आनंद की अधूरी तलाश साबित होता जा रहा है।

 भारी अर्थव्यवस्था के बीच इन ग्रामीण परिवारों को गौर से देखने पर इनका मायूसी भरा आत्मविश्वास, जिजीविषा एवं उम्मीद देखकर सुखद आत्मविश्वास की तसल्ली तो मिल जाती है, लेकिन पूरी आबादी के बीच एक भी सार्वजनिक हैंडपंप,आवास,शौचालय तथा सड़क के पूर्णतया अभाव से परिलक्षित कच्ची मिट्टी घास-फूस से बनी झोपड़िया 'झूठे आश्वासन के दौड़ में फंसी विकास के 'अंधी चाल' की कहानी बताने के लिए पर्याप्त हैं। जमीनी हकीकत का फलसफा यह है कि,चाहे कांटों भरी संकरी सड़के हो, मैंले-कुचैले खुले गड्ढों से पीने के पानी लेते दृश्य हो या कुपोषित बच्चे और बूढ़ों की त्रासदी, यह सभी 'मानवता शर्मसार, करने के लिए काफी है।

 

'लाकडाउन' के इस बेहद कठिन समय में भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित तथा राशन वितरण में कालाबाजारी जैसा गंभीर आरोप लगाते ग्रामीण आखिर जाएं तो जाएं कहां?

इसी सवाल का जवाब जब एलएनआई ने ग्रामप्रधान सिरसोती से पूछा तो उन्होंने बताया कि - "संपूर्ण आबादी के एनटीपीसी के कब्जे वाली जमीन में अनधिकृत एवं अवैध रूप से होने के कारण ग्रामसभा एनटीपीसी अधिकृत जमीन पर कोई सरकारी आवास, शौचालय, बिजली, पानी आदि सुविधाओं को देने में असमर्थ है"।  

 

वार्ड सदस्य महुआबारी के भी कई बार लिखित शिकायतों के बावजूद कई विभाग के आला अधिकारियों के गांव में अंदर आए बिना ही गांव के बाहर सड़क से ही कागजी कोरम पूरा करने की बात स्वीकारी गयी।

इस पूरे मामले पर काफी प्रयास करने के पश्चात भी "एलएनआई टीम" एनटीपीसी से संपर्क स्थापित करने में नाकामयाब रही। 

मीडिया से मिली संजीवनी के बावजूद 'असंभव से संभव'के बीच इनके समस्याओं के समाधान का वक्त कितना लंबा होगा जो दिखावट की जगह क्रांतिकारी जमीनी हकीकतों के सुधारों का सूत्रपात करते हुए दूरगामी फैसले वाला एक ऐसा सुपरिणाम दे सके जिसमें लोगों की खुशी एवं निज-सम्मान की अनुभूति का सहज अंदाजा लगाना मुमकिन हो जाय।

तो देखते हैं फिर... ...

           "कब बदलती है यहां की तस्वीर"।