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दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा गाँधी जी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में "गाँधी जी के विचारों की आज के दौर में प्रासंगिकता" विषय पर संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन
September 26, 2020 • Vijay Shukla • दिल्ली
दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा गाँधी जी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में "गाँधी जी के विचारों की आज के दौर में प्रासंगिकता" विषय पर संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन
गौरी मंजीत सिंह 
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 
दिल्ली।  संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा गाँधी जी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में दिनांक 26 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2020 तक गांधीजी के जीवन दर्शन को दर्शाने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे I आज दिनांक 26 सितम्बर 2020 को सप्ताह का शुभारम्भ करते हुए केंद्रीय पुस्तकालय सभागार में श्री आर. के. मीणा, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी द्वारा अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड सहित सभी सदस्यों एवं दि.प.ला अधिकारियों / कर्मचारियों की ओर से गाँधी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण किया गया I
उदघाटन कार्यक्रम के उपरान्त "गाँधी जी के विचारों की आज के दौर में प्रासंगिकता" विषय पर वेबिनार द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का आयोजन डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड की अध्यक्षता तथा श्री सुभाष चंद्र कंखेरिया, सदस्य, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के सानिध्य में किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में श्री दीपंकर श्री ज्ञान, निदेशक, गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति उपस्थित रहे I साथ ही, श्री महेश चन्द्र शर्मा, उपाध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड तथा पूर्व महापौर, दिल्ली नगर निगम विशेष रूप से संगोष्ठी में उपस्थित रहे ।
 
श्री दीपंकर श्री ज्ञान ने अपने वक्तव्य में श्रोताओं को गाँधी जी द्वारा समाज कल्याण हेतु किये गए कार्यों को विस्तार में बताया । उन्होंने गाँधी जी के विचारों से श्रोताओं को रूबरू करवाते हुए बताया कि गाँधी जी हमेशा चाहते थे कि एक स्वावलम्बी समाज का निर्माण किया जाये जिससे अंततः एक स्वावलम्बी राष्ट्र निर्मित हो।  उन्होंने यह भी बताया कि गाँधी जी कभी भी विदेशी उत्पादों के उपयोग का विरोध नहीं करते थे अपितु वह यह विचारधारा रखते थे कि हमें जिस भी उत्पाद की आवश्यकता है सर्वप्रथम हम उसका स्वयं निर्माण करने को प्राथमिकता दें।
 
हिंदी भाषा परखते हुए उन्होंने कहा कि गाँधी जी भी हिंदी को राजभाषा न बना कर उसे राष्ट्रभाषा बनाने के इच्छुक थे। उन्होंने गाँधी जी के तकनीक के विरोधी होने का खंडन करते हुए बताया कि उस समय में गाँधी जी ही थे जो सबसे अधिक टेलीप्रिंटर का उपयोग करते थे। उन्होंने महात्मा गाँधी जी की वसुधैव कुटुम्बकम विचारधारा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने महात्मा गाँधी जी के विचारों की प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रकट करते हुए बताया कि गाँधी जी हमारे पुराणों तथा ग्रंथों में विद्यमान विचारों के अनुयायी थे I
श्री सुभाष चंद्र कंखेरिया द्वारा बताया गया कि गाँधी जी के विचारों को अपनाने की राह में सर्वप्रथम हमें स्वच्छता अपनाने की आवश्यकता है। स्वच्छता का अर्थ अपने घर में साफ़ सफाई रखना नहीं बल्कि अपने आस-पास स्वच्छता बनाना, सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता का पालन करना है ताकि पूरे देश को स्वच्छ बनाया जा सके। उन्होंने गाँधी जी की स्वदेशी विचारधारा पर चर्चा करते हुए गाँधी जी के विचारों की आज के समय में प्रासंगिकता पर अपने विचार श्रोताओं से साझा किये।  
डॉ. रामशरण गौड़ द्वारा गाँधी जी के जीवन से जुड़े सत्याग्रह, स्वदेशी, स्वच्छता, अस्पृश्यता तथा अन्य सामाजिक विचारों से श्रोताओं को रूबरू करवाते हुए बताया गया कि गाँधी जी के विचार बहुत की उपयोगी हैं जिन्हें अवश्य ही अमल में लाना चाहिए। 
इन पर चर्चा करना तथा समाज को इनके प्रति जागरूक करना अत्यावश्यक है। उन्होंने कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष से अनुरोध किया कि गांधीजी के विभिन्न आयामों को साझा करने हेतु और अधिक कार्यक्रमों की योजना बनाई जानी चाहिए I
अंत में श्री आर. के. मीणा, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दि.प.ला. द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।