ALL हिमाचल-पंजाब-लेह लद्दाख-कश्मीर विजय पथ-सम्पादकीय-लेख-खास रपट हरियाणा- राजस्थान उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड-बिहार दिल्ली सोनभद्र-मिर्ज़ापुर राजनीति-व्यापार-सिनेमा-समाज-खेती बारी देश-विदेश मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़-झारखंड लोकल साथी
महाराजा ने ना की होती मदद तो विदेश में नहीं पढ़ पाते बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर 
October 7, 2020 • Vijay Shukla • विजय पथ-सम्पादकीय-लेख-खास रपट

महाराजा ने ना की होती मदद तो विदेश में नहीं पढ़ पाते बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर 

अंजलि यादव 
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया   

दिल्ली. ये बात तो सभी जानते है कि भारत रत्न से नवाजित डॉ. भीमराव आंबेडकर का दलित समाज के उत्थान और उन्हें जागरुक करने में बहुत बड़ा योगदान हैं. और साथ ही यह भी की बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव से जूझते हुए विषम परिस्थितियों में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपनी पढ़ाई शुरू की थी. जब डॉ. भीमराव आंबेडकर युवा थे, तो उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना था. ऐसे में उनके सामने आर्थिक संकट एक बहुत बड़ी समस्या थी. तो आइए जानते है की कैसे देश के महान हस्ती ने अपने जीवन में किन-किन परिस्थितिओं का सामना करके अपनी उच्च शिक्षा प्रप्त की थी.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी से चाहते  थे पढ़ना


बता दें कि युवा भीमराव आंबेडकर अपनी स्नातकोत्तर पढ़ाई कोलंबिया यूनिवर्सिटी से करना चाहते थे. उनके विदेश में पढ़ने के सपने को साकार करने के लिए एक महाराजा ने मदद की थी. हाल ही में करेंट अफेयर्स पर आधारित रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति में हॉट सीट पर बैठे एक प्रतियोगी से यह सवाल पुछा गया था. हालांकि प्रतियोगी के लिए इस सवाल का जवाब आसान नहीं था और उसे एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ी. तो आइए जानते हैं उस महाराजा के बारे में, जिसने युवा अंबेडकर को विदेश जाने में मदद की थी.

बड़ौदा महाराजा की आर्थिक मदद से पूरी की पढ़ाई


साल 1913 में अंबेडकर ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने के लिए बड़ौदा महाराजा के यहां आर्थिक मदद के लिए आवेदन दिया. बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ तृतीय के पास जब आंबेडकर का आवेदन पहुंचा, तो उन्होंने इसे मंजूर कर सालाना स्कॉलरशिप देना शुरू कर दिया. इस स्कॉलरशिप की मदद से आंबेडकर के लिए विदेश जाकर पढ़ाई करना आसान हो गया.

लेजिस्लेटिव असेंबली का बनाया गया सदस्य
युवा आंबेडकर जब विदेश से पढ़ाई कर वापस लौटे तो उन्हें बड़ौदा राज्य के लेजिस्लेटिव असेंबली का सदस्य बनाया गया. इसके साथ ही राज्य में एक कानून बनाया गया कि राज्य में अनुसूचित जाति के लोग भी चुनाव लड़ सकें. पिछड़े वर्ग, महिलाओं के साथ आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए बड़ौदा राज्य में चलाई जा रही योजनाओं का अंबेडकर पर भी असर पड़ा, जो संविधान निर्माण के दौरान नजर आया.

महाराजा सायाजीराव संरक्षण देने में रहते थे आगे

महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ तृतीय अपने राज्य में शिक्षा, कला, नृत्य आदि क्षेत्रों से जुड़ी बड़ी हस्तियों को संरक्षण देने में भी आगे रहते थे. ज्योतिबा फुले, दादाभाई नौरोजी, लोकमान्य तिलक, महर्षि अरविंद समेत कई हस्तियों को महाराजा सायाजीराव ने आर्थिक मदद दी. इसके साथ ही राज्य में लड़कियों के शिक्षा पर ध्यान देते हुए कई स्कूल खोले और प्राइमरी शिक्षा मुफ्त करने के साथ अनिवार्य कर दी.