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नहीं रहे रघुवंश बाबू
September 13, 2020 • Vijay Shukla • उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड-बिहार

विजय शुक्ल

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
पटना, दिल्ली . इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरजेडी के पूर्व नेता रघुवंश प्रसाद सिंह का निधन हो गया है.कोरोना से जंग जीतने के बाद वह घर लौटे थे. फिर रघुवंश बाबू निमोनिया के शिकार हो गए. जिन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया. एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज कराया जा रहा था.रघुवंश बाबू का इलाज दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान में चल रहा था. जहां आज उन्होंने अंतिम सांस ली. वे 74 वर्ष के थे.रघुवंश बाबू के निधन के बाद राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर है. कई बड़े नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है.


दिल्ली के एम्स के आइसीयू वार्ड में थे भर्ती.दो दिन पहले उनकी हालत बिगड़ गई थी. संक्रमण बढ़ गया था और सांस लेने में परेशानी होने के बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था.कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उनका पटना के एम्स में इलाज किया गया था.यहां पर निगेटिव होने के बाद उन्हें पोस्ट कोविड मर्ज के इलाज के लिए दिल्ली एम्स ले जाया गया था. अभी तीन दिन पहले ही उन्होंने राजद की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था.

विदित हो कि रघुवंश पसाद सिंह बीते दिनों कोरोना संक्रमित हो गए थे.तब पटना एम्‍स  में इलाज के दौरान उन्‍होंने आरजडी के उपाध्‍यक्ष सहित पार्टी के तमाम पदों से इस्‍तीफा दे दिया था. उन्‍हें मनाने की कोशिशें चल ही रहीं थीं कि वे फिर बीमार पड़ गए. इस बार दिल्‍ली एम्‍स में इलाज के दौरान उन्‍होंने 10 सितंबर को पार्टी से इस्‍तीफा दे दिया. रघुवंश के इस्‍तीफे को पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद याद ने स्‍वीकार नहीं किया. वे पार्टी में अपने विरोधी रामा सिंह  की एंट्री की कोशिशों से नाराज चल रहे थे.

फिर दिल्ली एम्स में इलाज के दौरान ही राजद से इस्तीफा दिया.इस तरह की खबर बिहार विधानसभा के चुनावी शोरगुल के बीच आई. इस खबर ने सबको चौंका दिया. आरजेडी के वरिष्ठ नेता और लालू प्रसाद यादव के सबसे विश्वसनीय व्यक्ति रघुवंश प्रसाद सिंह ने 10 सितंबर को पार्टी से इस्तीफा दे दिया. राजधानी दिल्ली स्थित एम्स में स्वास्थ्य उपचार करा रहे रघुवंश प्रसाद सिंह ने अस्पताल से एक चिट्ठी लालू यादव के नाम लिखी और 38 शब्दों में अपना त्यागपत्र उन्हें सौंप दिया.
चिट्ठी में रघुवंश प्रसाद सिंह ने लिखा, 'कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद 32 वर्षों तक आपके पीठ पीछे खड़ा रहा, लेकिन अब नहीं. पार्टी, नेता, कार्यकर्ता और आमजन ने बड़ा स्नेह दिया, क्षमा करें.' रघुवंश प्रसाद सिंह के इस चिट्ठी के बाद सियासी हलकों में तहलका मच गया. आनन-फानन में लालू यादव ने भी एक चिट्ठी लिखी.


लालू यादव ने लिखा, 'आपके द्वारा कथित तौर पर लिखी एक चिट्ठी मीडिया में चलाई जा रही है. मुझे तो विश्वास ही नहीं होता. अभी मेरे, मेरे परिवार और मेरे साथ मिलकर सिंचित राजद परिवार आपको शीघ्र स्वस्थ होकर अपने बीच देखना चाहता है.' पत्र में लालू ने आगे लिखा, 'चार दशकों में हमने हर राजनीतिक, सामाजिक और यहां तक कि पारिवारिक मामलों में मिल-बैठकर ही विचार किया है. आप जल्द स्वस्थ हो जाएं, फिर बैठकर बात करेंगे. आप कहीं नहीं जा रहे हैं. समझ लीजिए.'

रघुवंश प्रसाद सिंह ने शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम से जारी अपने पत्र में वैशाली की चिंता की है. पत्र में उन्होंने वहां के तालाबों को जल-जीवन-हरियाली अभियान से जोड़ने का आग्रह किया है.साथ ही विश्व के प्रथम गणतंत्र के सम्मान में महात्मा गांधी सेतु रोड में हाजीपुर के पास भव्य द्वार बनाकर मोटे अक्षरों में विश्व का प्रथम गणतंत्र वैशाली द्वार दर्ज कराने का आग्रह किया है.उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर की वैशाली से संबंधित कविताओं को जगह-जगह मोटे अक्षरों में लिखवाने का आग्रह भी किया है, ताकि आने-जाने वाले लोग दूर से ही इन्‍हें पढ़ सकें. वहीं उन्होंने 'बज्जीनां सत अपरीहानियां धम्मा' के अनुसार सातों धर्मों का उल्लेख जगह-जगह बड़ी दीवार पर पाली, हिंदी और अंग्रेजी में कराने तथा वैशाली के उद्धारक जगदीशचंद्र माथुर की प्रतिमा लगाने के भी आग्रह किए हैं.

इसके बाद दिल्ली से लेकर पटना तक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. बीजेपी-जेडीयू  ने रघुवंश प्रसाद सिंह के फैसले का स्वागत किया और आरजेडी पर निशाना साधते हुए उन्हें एनडीए में आने का न्यौता दिया. लेकिन रघुवंश प्रसाद सिंह अभी खामोश हैं. उन्होंने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है.इस बीच शुक्रवार को रघुवंश प्रसाद सिंह ने एक पत्र बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मनरेगा  में संशोधन के लिए लिखा. उन्होंने सरकारी और एससी-एसटी की जमीन में मनरेगा के तहत काम का मुद्दा उठाया. साथ ही किसानों की जमीन में काम को मनरेगा से जोड़ने की मांग की.

रघुवंश प्रसाद सिंह ने लिखा, 'नया क्लॉज जोड़कर अध्यादेश जारी किया जाए. किसानों का भाग जुड़ने से रोजगार गारंटी देने में सहूलियत होगी.' इसके साथ ही रघुवंश प्रसाद सिंह ने इसको लेकर केंद्रीय ग्रमीण विकास मंत्री को भी चिट्ठी लिखी थी. बता दें कि हाल में एससी-एसटी को लेकर नीतीश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. बिहार सरकार ने एससी-एसटी उत्पीड़न में मौत पर परिजन को नौकरी देने का ऐलान किया है.
इधर, रघुवंश प्रसाद के इस्तीफे पर राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है. क्योंकि बीते कुछ महीने से 'रघुवंश बाबू' के हाव-भाव बता रहे थे कि वह कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं. इसकी एक झलक कुछ महीने पूर्व दिखी थी, जब उन्होंने आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के साथ सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था.

खैर सियासत बदल गई है और आरजेडी में नए लोगों के हाथ में कमान है. जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव  को कमान मिलने के बाद से रघुवंश प्रसाद सिंह की आरजेडी में वह पकड़ नहीं रह गई है, जो लालू के समय थी. साथ ही अब धीरे-धीरे पुराने समाजवादी नेताओं का आरजेडी से बोरिया-बिस्तर बंधना शुरू हो गया.वहीं, लालू यादव और रघुवंश प्रसाद सिंह के दोस्ती के किस्से पुराने हैं. दोनों एक-दूसरे के कितने घनिष्ठ है, इसकी झलक कई मौकों पर देखने को मिली है. अभी लालू जेल में हैं और रघुवंश अस्पताल में, लेकिन वह भी एक दौर था कि रघुवंश प्रसाद सिंह साए की तरह हमेशा लालू के साथ हर मौके पर खड़े रहे. जब भी जरूरत हुई रघुवंश प्रसाद आगे आकर लालू और आरजेडी का बचाव किया लेकिन अपने पत्र में उन्होंने लिखा-'अब नहीं'.


खैर , उनके निधन पर बिहार में शोक की लहर है.उनके निधन पर जेडीयू नेता केसी त्‍यागी ने शोक प्रकट करते हुए इसे राजनीति की पूरणीय क्षति बताया है. इसके पहले उन्‍होंने आइसीयू से ही उन्‍होंने राष्‍ट्रीय जनता दल से इस्‍तीफा देने का अपना पत्र जारी कर बिहार विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सियासी हड़कम्‍प मचा दिया था.अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चाहिए रघुवंश बाबू की अंतिम इच्छा को पूरी करें.आपके नाम से जारी अपने पत्र में वैशाली की चिंता की थी पत्र में उन्होंने वहां के तालाबों को जल-जीवन-हरियाली अभियान से जोड़ने का आग्रह किया है.साथ ही विश्व के प्रथम गणतंत्र के सम्मान में महात्मा गांधी सेतु रोड में हाजीपुर के पास भव्य द्वार बनाकर मोटे अक्षरों में विश्व का प्रथम गणतंत्र वैशाली द्वार दर्ज कराने का आग्रह किया है.उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर की वैशाली से संबंधित कविताओं को जगह-जगह मोटे अक्षरों में लिखवाने का आग्रह भी किया है, ताकि आने-जाने वाले लोग दूर से ही इन्‍हें पढ़ सकें.