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संस्कृति विवि और रोसनाउ विवि रूस के बीच एमओयू हुआ साइन, संस्कृति विवि ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ाया एक और कदम
July 18, 2020 • Vijay Shukla • सोनभद्र-मिर्ज़ापुर

संस्कृति विवि और रोसनाउ विवि रूस के बीच एमओयू हुआ साइन, संस्कृति विवि ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ाया एक और कदम

 

संस्कृति विवि  और रूस के रोसनाऊ विवि के बीच आन लाइन एमओयू को अंतिम रूप देते संस्कृति विवि के कुलाधिपति सचिन गुप्ता व रोसनाऊ विवि के अधिकारी

 

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट बच्चू सिंह

लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया 

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों के कौशल विकास और विश्वस्तरीय शैक्षणिक उन्नयन के लिए एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। रूस के प्रतिष्ठित रोसनाउ विश्वविद्यालय से संस्कृति विश्वविद्यालय ने एमओयू(मेमोरेंडम आफ अंडरस्टेडिंग) पर हस्ताक्षर कर विश्वविद्यालय के अकादमिक, रिसर्च, इनोवेशन, उद्यमिता, गुणवत्ता प्रबंधन, कोर्स डवलपमेंट, स्टूडेंट एक्सचेंज, फैकल्टी एक्सचेंज इत्यादि क्षेत्रों में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने के लिए अपनी वचनबद्धता को नया आयाम दिया है।  

ज्ञात हो कि रोसनाउ विश्वविद्यालय रूस के अग्रिम १०० विश्वविद्यालयों में पिछले ९ वर्षों से अपना स्थान बनाने के साथ ही इसी वर्ष इसे वर्ष के सर्वश्रेष्ठ निजी विश्वविद्यालय के रूप में भी आँका गया है।  

 

इस द्विपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर संस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने किए एवं रोसनाउ विश्वविद्यालय रूस के रेक्टर व्लादिमीर ए जेर्नोव ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। खास बात यह रही कि यह पहली बार हुआ की दोनों पक्ष के विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन ज़ूम प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर एमओयू पर हस्ताक्षर किये, जिसमे दोनों विश्वविद्यालय के उच्च पदस्थ अधिकारीगण मौजूद थे। इस अवसर पर रोसनाउ विश्वविद्यालय के अन्तर राष्ट्रीय मामलों के निदेशक जॉर्ज गाब्रिलिओन, संस्कृत विश्वविद्याला के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रोफेसर पी सी छाबड़ा, सक्षम गुप्ता, प्रतीक खरे इत्यादि मौजूद थे।  

 

इस एमओयू से छात्रों को कई उच्च स्तरीय ज्ञान, कौशल एवं तज़ुर्बे प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय फैकल्टी सदस्यों से ज्ञान एवं कौशल प्राप्त करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हो सकता है। छात्र एवं छात्राएं शोध एवं नवाचार के लिए आसानी से विदेश भी जा सकते है ताकि वे अपने शोध एवं इनोवेशन संबधित कार्यों को द्रुत गति से निष्पादित कर सकें। छात्र कई विदेशी शिक्षकों से शोध सम्बन्धी कार्यों में विदेशी प्रसिद्ध शिक्षकों से मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकेंगे। 

इस अवसर पर कुलाधिपति श्री सचिन गुप्ता जी ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा की वे एम ओ यू में उल्लिखित तथ्यों को मूर्त रूप में होते हुए देखना चाहेंगे ताकि एमओयू की सार्थकता एवं प्रासंगिकता स्थापित हो सके। उन्होंने यह भी कहा की भारत और रूस के बीच पुराने सम्बन्ध काफी प्रगाढ़ रहे हैं और सभ्यता और संस्कृति के उद्भव के दौरान दोनों देशों केबीच मैत्री एवं परस्पर सहयोग बना रहा है। हम लोग उच्च शिक्षा, रिसर्च, नवाचार इत्यादि क्षेत्रों में परस्पर सहयोग कर इस एमओयू की लिखित मंशाओं को फलीभूत करने का पूरा प्रयास करेंगे। 

 

कुलपति डॉ राणा सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालयों से एमओयू करने से विश्वविद्यालय के अकादमिक, शोध, नवाचार, उद्यमिता, गुणवत्ता प्रबंधन, पाठ्यक्रम उन्नयन, छात्र विनिमय, संकाय सदस्य विनिमय इत्यादि क्षेत्रों में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने की प्रक्रिया को बहुआयामी गति एवं ऊर्जा मिलेगी।