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वर्तमान सरकार की नीति  और नीयत में हैं खोट , शिलान्यास तो हुआ पर काम अब भी नहीं हुआ शुरू : सुधीर शर्मा 
November 18, 2020 • Vijay Shukla • हिमाचल-पंजाब-लेह लद्दाख-कश्मीर

वर्तमान सरकार की नीति  और नीयत में हैं खोट , शिलान्यास तो हुआ पर काम अब भी नहीं हुआ शुरू : सुधीर शर्मा 

 

गौरव सूद 

लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया 

धर्मशाला।  कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा की केंद्रीय विश्वविद्यालय पर सियासत करने वाले ये भूल जाते हैं की 2 अक्टूबर 2007 को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री  पी चिदंबरम हिमाचल प्रदेश आए थे और रिज मैदान से “आम आदमी बीमा योजना” का शुभारंभ किया था , उसी मंच से उन्होंने प्रदेश के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय और IIT की घोषणा की थी। उसके बाद प्रदेश में चुनाव हुए और भारतीय जनता पार्टी ने  प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में सत्ता सँभाली और वही से केंद्रीय विश्वविद्यालय का मुद्दा राजनीतिक हो गया जब घोषणा हुई थी तो ये निर्णय हुआ था कि केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना धर्मशाला में की जाएगी लेकिन जैसे ही सरकार बदली देहरा और धर्मशाला के बीच केंद्रीय विश्वविद्यालय का बँटवारा हो गया धर्मशाला के इंद्रु नाग में पहले केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए जगह देखी गई थी बाद में उस भूमि को उचित ना पाकर देहरा को चुना गया तत्कालीन भाजपा सरकार का कार्यकाल ख़त्म हुआ। 

2012 में फिर कांग्रेस सरकार बनी और बल्ला जद्रांगल में केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए नए सिरे से भूमि का चयन किया गया सारी औपचारिकताओं को पूरा किया गया।  आज की परिस्थिति में प्रदेश और केंद्र सरकार शिलान्यास तो कर चुके हैं लेकिन निर्माण कार्य ना देहरा में और न धर्मशाला में शुरू हुआ। इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि सरकार पूरा धन होते हुए भी प्रदेश हित में बनने वाले बड़े बड़े प्रोजेक्टों को किस तरह राजनीति की भेंट कर देती है।  आज धर्मशाला में जो भूमि चयनित की गई थी उसकी फ़ॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। सरकार यदि चाहे तो जो जगह धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए चुनी गई थी उसकी फ़ॉरेस्ट क्लीयरेंस के बदले दिए जाने वाला NPB का पैसा सरकार के पास नहीं है और उसके बदले दी जाने वाली भूमि का अभी तक चयन नहीं हुआ है अधिकारियों को निर्देश दिया गया है क्या आप प्रोजेक्ट को आधा कर दें यही वर्तमान सरकार की नियत और नीति है क्या केंद्रीय विश्वविद्यालय ऐसे ही अधर में लटका रहेगा?
या केवल मात्र बहस का हिस्सा रहेगा?
देहरा में होने वाले आंदोलन बेकार जाएँगे?
धर्मशाला ने आंदोलन तो नहीं किया पर क्या मुझ जैसे व्यक्ति के प्रयास बिफल हो जाएँगे?
मैंने अपने कार्यकाल में यह भूमि क्यूँ तलाश की ? 
मेरा निजी हित नहीं था , यह न्याय की बात थी।  अगर IIT मंडी को दिया गया तो केंद्रीय विश्वविद्यालय काँगड़ा को मिला था। 
आज भाजपा देश और प्रदेश दोनों में सत्तासीन है फिर देरी क्यों?
इतिहास गवाह रहेगा किस तरह विद्या का मंदिर राजनीति की भेंट चढा।