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विद्यर्थी अपनी क्षमताओं में विकास कर पा सकते हैं अच्छी नौकरी
November 20, 2020 • Vijay Shukla • उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड-बिहार

संस्कृति विवि वेबिनार::विद्यार्थी  अपनी क्षमताओं में विकास कर पा सकते हैं अच्छी नौकरी

संस्कृति विवि की वेबिनार को संबोधित करते डा. राकेश कुमार।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट बच्चू सिंह 

लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया 

मथुरा। वर्तमान चुनौतीपूर्ण दौर में विद्यार्थियों की सफलता के लिए उन्हें क्या कदम उठाने चाहिए, जैसे ज्वलंत मुद्दे को लेकर संस्कृति विश्वविद्यालय लगातार देशभर के चुने हुए विशेषज्ञों से विद्यार्थियों को रूबरू करा रहा है। इसी क्रम में, ‘द फर्स्ट स्टेप टुवार्डस सक्सेस’ (सफलता की दिशा में पहला कदम) विषयक एक उपयोगी वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार के मुख्य वक्ता थे दिल्ली विश्वविद्यालय एसोसिएट प्रोफेसर डा.राकेश कुमार।

विद्यार्थियों की क्षमता विकास के उद्देश्य से आयोजित की गई इस वेबिनार में मुख्य वक्ता डा. राकेश कुमार ने विद्यार्थियों को बताया कि वे किस प्रकार से वर्तमान चुनौती भरे माहौल में अपने को बेहतर बनाकर कंपनियों में रोजगार पाने में सफल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी में किसी नौकरी के लिए आवेदन करने से ही आपकी क्षमताओं और योग्यताओं का आकलन शुरू हो जाता है। इसलिए जब भी किसी कंपनी में अपना रिज्यूमे दें, तो वह रिज्यूमे बहुत सोच-समझकर तैयार करें। उन्होंने बताया कि एक अच्छा रिज्यूमे कैसा होता है। उन्होंने कहा कि कभी भी रिज्यूमे बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। ऐसे अभ्यर्थी जो पहली बार किसी नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनका एक पेज का रिज्यूमे पर्याप्त है। इस रिज्यूमे में एक ऐसा पासपोर्ट साइज फोटो जिसमें चेहरा स्पष्ट हो न की विभिन्न आदाओं या बहुत ज्यादा फैशनेबल वस्त्रों के साथ खिंचाया गया फोटो, लगाना चाहिए। जन्म तिथि भले ही न लिखी हो, पिता का नाम होना चाहिए। ऐकेडमिक रिकार्ड का विविरण नए से पुराने के क्रम में होना चाहिए। ऐसी ही अनेक उपयोगी जानकारी उन्होंने विद्यार्थियों को रिज्यूमे के संदर्भ में दीं।

डा. राकेश ने विद्यार्थियों को बताया कि साक्षात्कार के समय वे कैसा बर्ताव करें, सवाल को समझने के लिए उसे गंभीरता से सुनें, जितना सवाल का उत्तर बनता उतना ही दें। इसके अलावा उन्होंने ग्रुप डिस्कशन के बारे में भी विद्यार्थियों को बारीक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्रुप डिस्कशन के दौरान अपनी बात कहने के साथ दूसरों की बात सुनने की भी योग्यता होनी चाहिए। अपनी बात कहने का तरीका बहुत प्रभावशाली और सौम्य होना चाहिए। डा. राकेश ने विद्यार्थियों को सफलता के अनेक गुरुमंत्र बताए और कहा कि आप ऐसे विवि में पढ़ रहे हैं जिसकी सोच ग्लोबल है, वह आपको अतंर्ऱाष्ट्रीय स्तर पर खड़ा करना चाहता है। संस्कृति स्कूल आफ इंजीनियरिंग के डीन सुरेश कासवान के धन्यवाद ज्ञापन के साथ वेबिनार संपन्न हुई।